Saturday, 15 February 2014

'एग्जिट प्लान' को बखूबी अंजाम दिया केजरीवाल ने

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'एग्जिट प्लान' को बखूबी अंजाम दिया केजरीवाल ने
प्रशांत सोनी, नई दिल्ली
दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को जन लोकपाल बिल का जो हश्र हुआ, उसे देखकर सरकार की मंशा पर भी कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या सीएम अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार खुद ही नहीं चाहती थी कि बिल पेश हो।

यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि जब स्पीकर से इजाजत लेकर सीएम केजरीवाल ने सदन में बिल पेश कर दिया था और स्पीकर ने उसे स्वीकार भी कर लिया था, उसके बावजूद सरकार और स्पीकर बिल पर वोटिंग कराने के लिए राजी क्यों हुए, जबकि यह तय था कि अगर वोटिंग हुई तो बिल पेश करने के खिलाफ ही होगी।

केजरीवाल गुरुवार को ही साफ कर चुके थे कि अगर सदन में बिल पेश करने या पास करने को लेकर वोटिंग होती है और फैसला बिल के और सरकार की मंशा के खिलाफ जाता है, तो वह इस्तीफा दे देंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केजरीवाल खुद ही चाहते थे कि बिल को लेकर वोटिंग हो, ताकि उन्हें सरकार से एग्जिट करने का मौका और रास्ता मिल जाए।
रामेश्वर दयाल, नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा इस्तीफा दिए जाने से सारी राजनीतिक गतिविधियां अब राजनिवास पर जाकर केंद्रित हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उपराज्यपाल नजीब जंग दिल्ली को राजनीतिक भंवर से निकालने के लिए क्या निर्णय लेंगे? लेकिन माना जा रहा है कि इस मसले पर फैसला उपराज्यपाल नहीं राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी करेंगे। इस राजनीतिक घटनाक्रम पर एलजी तो सिर्फ एक संदेशवाहक के तौर पर काम करेंगे। कयासों के इस दौर के बीच जंग ने केजरीवाल के इस्तीफे की चिट्ठी राष्ट्रपति को भेज दी है। उन्होंने राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय को केजरीवाल के इस्तीफे के बाद के ताजा हालात की रिपोर्ट भी भेजी है।

सरकार के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक खास रणनीति के तहत कल रात अपना इस्तीफा वैसे तो राजनिवास जाकर उपराज्यपाल को सौंपा है, लेकिन असल में उन्होंने अपना यह इस्तीफा सीधे राष्ट्रपति को लिखा है और उसकी कॉपी उपराज्यपाल को सौंपी है। पत्र में उन्होंने जानकारी दी है कि सरकार की कैबिनेट ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है, इसलिए दिल्ली विधानसभा भंग कर नई विधानसभा बनाने के लिए जल्द चुनाव करवाएं जाएं। ऐसा कर केजरीवाल ने गेंद उपराज्यपाल के बजाय राष्ट्रपति के पाले में डाल दी है।

राजनिवास सूत्रों के अनुसार इस मसले पर उपराज्यपाल की ओर से राष्ट्रपति भवन को न तो कोई सलाह दी जाएगी, न ही तत्कालीन राजनैतिक समीकरणों को देखते हुए कोई सिफारिश की जाएगी। राजनिवास से जुड़े एक आला अधिकारी के अनुसार ऐसे संवेदनशील मामलों में राजनिवास का काम सिर्फ 'संदेशवाहक' का होता है।
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देश वासियों को खुश होना चाहिये कि सस्ते में निपट गये कहीं आम आदमी पार्टी की अनुभवहीनता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होती तो फिर सोच सकते हो इसी कितनी भारी कीमत चुकानी पड सकती थी.
भईया..युगपुरुष ने आगे पीछे सब कुछ सोचकर फैसला लिया है..पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर पूरी जिन्दगी के लिए दिल्ली में एक मुफ्त में बंगला,चालीस हजार रूपये महिना पेंशन,ऑफिस खर्च के लिए बीस हजार रूपये महीना,दो निजी सहायक,सुरक्षा गार्ड और पुरे भारत में कही भी जाने के लिए मुफ्त हवाई टिकट...केजरीवाल जी मजे से भोगिये..जब लम्पट जगदम्बिका पाल सिर्फ दो घंटे के लिए यूपी का मुख्यमंत्री बनकर लखनऊ में बंगला और पेशन का मजा ले सकता है तो आप क्यों पीछे रहे ??..और सिर्फ केजरीवाल ही नही...सारे पूर्व मंत्री भी पेंशन और दिल्ली में बंगले के हकदार हो गये .... दिल्ली वालो..अपने सर का बाल नोचो..क्या 'कजरी' नाम का "आम" आदमी त्यागेगा इन सभी सुविधाओं के..अपने आदर्श के नाम पर..??!!..