मेरे प्रिय नेताओ,
बड़ा बुरा लगा कि IBA ने एक बार फिर आप लोगो को डांट कर कमरे से निकाल दिया. कोई बात नहीं, हम जानते हैं कि नेताओ का एक सबसे बड़ा गुण बेशर्मी है, इसलिय बार बार IBA के कमरे में बेइज्जत होने के लिए घुसिएगा और वोह 5% का लोलीपोप दे कर बार बार आपकी और indirectly हमारी इन्सल्ट करेगी. कैसे हिम्मत होती है IBA की इस तरह की बात करने की. जैसे ही IBA 5% की बात करती आप को कमरे से यह कह कर बाहर आ जाना चाहिए था की हम तो 5 दिन की strike की कॉल दे रहे है. हाथ पकड़ कर आपका वापस बुलाते.
एक बात बताओ यार क्या किसी पंडित ने तुमको बताया है की केवल Single Point Agenda न रखो. अगर केवल एक बात और केवल एक बात वेज रिविजन में रखी होती की भैया हमें तो सिक्स्थ पे कमीशन के बराबर लेना है और जब भी सरकार का अगला वेज रिविजन हो तो हमको भी उसमे ले लेना तो क्या गलत बात होती. बहत्तर इश्यूज वेज revisun में घुसेड दिया और वेज revision की माँ की आँख कर दी.
हाँ गलत यह होता की जो पांच साल तक आप लोग बैंक एम्प्लाइज को बेवक़ूफ़ बनाते हो वह नहीं बना पाते. आपकी इम्पोर्टेंस ख़तम हो जाती. क्या आपको पता है की बीस लाख आंखे आपकी ओर कितनी आशा भरी नजरो से देख रही हैं और आप और IBA 5% की बात कर रहे हैं. शर्म है.
IBA जब कहती है की वोह 5% से ज्यादह नहीं दे सकती क्योकि प्रॉफिट कम है तो कृपा कर के उसे भारतीय रेल की स्थिति बता देते कि भैया उसमे भी तो करोडो का लोस होता है तब काहे बढ़ी हुई पे दे रहे हो. पर हमें पता है की आप यह नहीं बोलोगो क्योकि एक तो आपकी उम्र हो गयी है दूसरा आप च्यवनप्राश नहीं खाते हो. ड्राई फ्रूट जब आता है तो काजू उठा लेते हो , बादाम फिर भी नहीं खाते. दिमाग कहाँ से तेज होगा. और negotiation के लिए तेज दिमाग और दृढ इच्छाशक्ति की बहुत आवश्यकता है.
आपसे विनर्म अनुरोध है की नए बच्चों को आगे लाये. पढ़े लिखे बच्चे हैं नए ख्यालात लायेंगे. आप परदे के पीछे से गाइड करे और एक अनुभवी बुजुर्ग का रोले निभाए. अब समय है की अपना स्वार्थ छोड़ कर बैंक एम्प्लाइज की दुर्दशा देखे.
हमारी आपको यह सलाह है की कल जब आप दाढ़ी बनाये तो शीशे में अपना मुह देखे और मारे शर्म के उसे नीचे कर ले क्योकि हमारी आज की pathetic condition के लिए आप और केवल आप ही जिम्मेदार हैं. आपके लिए यही सजा काफी है. यह सोच सोच कर डरा करे की कहीं बैंकिंग इंडस्ट्री में भी कोई केजरीवाल खड़ा हो गया तो आपका और आपकी ऐश का क्या होगा.
वैसे तो आप काफी बिजी रहते है पर अगर आपके पास कभी कुछ समय हो तो कृपया विचार कर हमें बताये कि:-
- हमारी पे सिक्स्थ पे कमीशन से कम क्यों है
- हम रोज़ पांच बजे के बाद क्यों काम करे
- हम सप्ताह में छह दिन क्यों काम करे.
- हमारी PL क्यों लैप्स हो जाती है. सेंट्रल की तरह दस महीने क्यों नहीं है.
- अगर हमको साल में 30 Pl, 12 CL इत्यादि मिलती है तो लेने क्यों नहीं दिया जाता
- सबसे बड़ी यूनियन SBI में है, तो अपने बाकी मेम्बरान को वह सारे बेनिफिट क्यों नहीं देते है जो SBI में है.
- एक शाखा पांच स्टाफ से कम में क्यों खुलने देते हैं.
- अधिकारी क्लर्क का काम और क्लर्क चपरासी का काम क्यों करे.
- हर जिले में रिज़र्व स्टाफ क्यों नहीं है ताकि छुट्टी जाने पर भेजा जा सके.
- ट्रेनिंग आने पर कैंसिल क्यों कर दी जाती है.
- नए स्टाफ नौकरी क्यों त्याग रहे हैं. क्या कारण है की बैंक में कोई भी नौकरी नहीं करना चाहता है.
- पिछले पांच सालो में कितने नेताओ को chargesheet मिली
- हमारी पेंशन क्यों नहीं बढती है.
- IBA क्यों RTI में नहीं है. क्या आपने Delhi High Court / सुप्रीम कोर्ट में इस सन्दर्भ में मुकदमा किया.
आपने सुना होगा की वीर भोगे वसुंधरा. आप मानो न मानो आप कायर हो. इसलिए आपमें हमारे लिए लड़ने का बूता ही नहीं है. किसने आपको मना किया है की न्यूज़ पेपर में फुल पेज का comparative wage scale का ऐड न दे, ताकि दुनिया को पता चले की क्या स्थिति है. अभी हर आदमी को यह लगता है की बैंक में बहुत अच्छी पे है. किसने आपसे कहा है की आप indefinit strike न करे. अगर indefinite strike fail हो भी गयी तो भविष्य में कोई नहीं कहेगा की indefinite strike क्यों नहीं करते है. अपनी नियति से हम समझौता कर लेंगे.
सेंट्रल के एक क्लर्क से कम पे एक PO की है. एक सफाई कर्मचारी से कम पे एक नए क्लर्क की है. आप कैसे यह दशा देख कर चैन से सो सकते हैं. धिक्कार है आपको और आपकी इस ओछी राजनीती को.
पुरुषार्थ करे हम आपके साथ है. आप लड़ सकते हैं. बस हनुमान जी की तरह आपको अपना बल याद दिलाने की जरूरत है.
याद रखे की इस बार बेवक़ूफ़ बनाया तो आपका मालिक भगवान भी नहीं होगा. मुह दिखने लायक तो आप अभी भी नहीं बचे हैं. आपकी इज्जत आपके खुद के हाथ में हैं और आपका भविष्य हमारे हाथो में.
कभी खाली हो तो सोचियेगा की 7th pay Commission के बाद बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी दूसरो के सामने भिखारी जैसे लगेंगे और आप शायद भिखारियों के शहंशाह.

बड़ा बुरा लगा कि IBA ने एक बार फिर आप लोगो को डांट कर कमरे से निकाल दिया. कोई बात नहीं, हम जानते हैं कि नेताओ का एक सबसे बड़ा गुण बेशर्मी है, इसलिय बार बार IBA के कमरे में बेइज्जत होने के लिए घुसिएगा और वोह 5% का लोलीपोप दे कर बार बार आपकी और indirectly हमारी इन्सल्ट करेगी. कैसे हिम्मत होती है IBA की इस तरह की बात करने की. जैसे ही IBA 5% की बात करती आप को कमरे से यह कह कर बाहर आ जाना चाहिए था की हम तो 5 दिन की strike की कॉल दे रहे है. हाथ पकड़ कर आपका वापस बुलाते.
एक बात बताओ यार क्या किसी पंडित ने तुमको बताया है की केवल Single Point Agenda न रखो. अगर केवल एक बात और केवल एक बात वेज रिविजन में रखी होती की भैया हमें तो सिक्स्थ पे कमीशन के बराबर लेना है और जब भी सरकार का अगला वेज रिविजन हो तो हमको भी उसमे ले लेना तो क्या गलत बात होती. बहत्तर इश्यूज वेज revisun में घुसेड दिया और वेज revision की माँ की आँख कर दी.
हाँ गलत यह होता की जो पांच साल तक आप लोग बैंक एम्प्लाइज को बेवक़ूफ़ बनाते हो वह नहीं बना पाते. आपकी इम्पोर्टेंस ख़तम हो जाती. क्या आपको पता है की बीस लाख आंखे आपकी ओर कितनी आशा भरी नजरो से देख रही हैं और आप और IBA 5% की बात कर रहे हैं. शर्म है.
IBA जब कहती है की वोह 5% से ज्यादह नहीं दे सकती क्योकि प्रॉफिट कम है तो कृपा कर के उसे भारतीय रेल की स्थिति बता देते कि भैया उसमे भी तो करोडो का लोस होता है तब काहे बढ़ी हुई पे दे रहे हो. पर हमें पता है की आप यह नहीं बोलोगो क्योकि एक तो आपकी उम्र हो गयी है दूसरा आप च्यवनप्राश नहीं खाते हो. ड्राई फ्रूट जब आता है तो काजू उठा लेते हो , बादाम फिर भी नहीं खाते. दिमाग कहाँ से तेज होगा. और negotiation के लिए तेज दिमाग और दृढ इच्छाशक्ति की बहुत आवश्यकता है.
आपसे विनर्म अनुरोध है की नए बच्चों को आगे लाये. पढ़े लिखे बच्चे हैं नए ख्यालात लायेंगे. आप परदे के पीछे से गाइड करे और एक अनुभवी बुजुर्ग का रोले निभाए. अब समय है की अपना स्वार्थ छोड़ कर बैंक एम्प्लाइज की दुर्दशा देखे.
हमारी आपको यह सलाह है की कल जब आप दाढ़ी बनाये तो शीशे में अपना मुह देखे और मारे शर्म के उसे नीचे कर ले क्योकि हमारी आज की pathetic condition के लिए आप और केवल आप ही जिम्मेदार हैं. आपके लिए यही सजा काफी है. यह सोच सोच कर डरा करे की कहीं बैंकिंग इंडस्ट्री में भी कोई केजरीवाल खड़ा हो गया तो आपका और आपकी ऐश का क्या होगा.
वैसे तो आप काफी बिजी रहते है पर अगर आपके पास कभी कुछ समय हो तो कृपया विचार कर हमें बताये कि:-
- हमारी पे सिक्स्थ पे कमीशन से कम क्यों है
- हम रोज़ पांच बजे के बाद क्यों काम करे
- हम सप्ताह में छह दिन क्यों काम करे.
- हमारी PL क्यों लैप्स हो जाती है. सेंट्रल की तरह दस महीने क्यों नहीं है.
- अगर हमको साल में 30 Pl, 12 CL इत्यादि मिलती है तो लेने क्यों नहीं दिया जाता
- सबसे बड़ी यूनियन SBI में है, तो अपने बाकी मेम्बरान को वह सारे बेनिफिट क्यों नहीं देते है जो SBI में है.
- एक शाखा पांच स्टाफ से कम में क्यों खुलने देते हैं.
- अधिकारी क्लर्क का काम और क्लर्क चपरासी का काम क्यों करे.
- हर जिले में रिज़र्व स्टाफ क्यों नहीं है ताकि छुट्टी जाने पर भेजा जा सके.
- ट्रेनिंग आने पर कैंसिल क्यों कर दी जाती है.
- नए स्टाफ नौकरी क्यों त्याग रहे हैं. क्या कारण है की बैंक में कोई भी नौकरी नहीं करना चाहता है.
- पिछले पांच सालो में कितने नेताओ को chargesheet मिली
- हमारी पेंशन क्यों नहीं बढती है.
- IBA क्यों RTI में नहीं है. क्या आपने Delhi High Court / सुप्रीम कोर्ट में इस सन्दर्भ में मुकदमा किया.
आपने सुना होगा की वीर भोगे वसुंधरा. आप मानो न मानो आप कायर हो. इसलिए आपमें हमारे लिए लड़ने का बूता ही नहीं है. किसने आपको मना किया है की न्यूज़ पेपर में फुल पेज का comparative wage scale का ऐड न दे, ताकि दुनिया को पता चले की क्या स्थिति है. अभी हर आदमी को यह लगता है की बैंक में बहुत अच्छी पे है. किसने आपसे कहा है की आप indefinit strike न करे. अगर indefinite strike fail हो भी गयी तो भविष्य में कोई नहीं कहेगा की indefinite strike क्यों नहीं करते है. अपनी नियति से हम समझौता कर लेंगे.
सेंट्रल के एक क्लर्क से कम पे एक PO की है. एक सफाई कर्मचारी से कम पे एक नए क्लर्क की है. आप कैसे यह दशा देख कर चैन से सो सकते हैं. धिक्कार है आपको और आपकी इस ओछी राजनीती को.
पुरुषार्थ करे हम आपके साथ है. आप लड़ सकते हैं. बस हनुमान जी की तरह आपको अपना बल याद दिलाने की जरूरत है.
याद रखे की इस बार बेवक़ूफ़ बनाया तो आपका मालिक भगवान भी नहीं होगा. मुह दिखने लायक तो आप अभी भी नहीं बचे हैं. आपकी इज्जत आपके खुद के हाथ में हैं और आपका भविष्य हमारे हाथो में.
कभी खाली हो तो सोचियेगा की 7th pay Commission के बाद बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी दूसरो के सामने भिखारी जैसे लगेंगे और आप शायद भिखारियों के शहंशाह.

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